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केरल सामान्य ज्ञान Kerala Samanya Gyan

केरल सामान्य ज्ञान Kerala Samanya Gyan

नमस्कार दोस्तों, Shital RCS GYAN के इस ब्लॉग में आपका स्वागत है। आज के इस आर्टिकल में केरल सामान्य ज्ञान के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य बताने जा रहा हूँ l यह केरल के सभी कम्पटीशन एग्जाम के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। UPSC, PCS, SSC, RAILWAY और सभी अन्य कम्पटीशन एग्जाम के लिए इम्पोर्टेन्ट माईने रखता है। दोस्तों आप हमारे वेबसाइट से जुड़े रहें ताकि मैं आप के लिए और भी स्टडी मटेरियल, सामान्य ज्ञान, प्रीपरेशन टिप्स का जानकारी लाता रहूं।

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केरल सामान्य ज्ञान

स्थापना दिवस – 1 नवंबर 1956
राजधानी – तिरुवनन्तपुरम
सबसे बड़ा शहर – तिरुवनन्तपुरम
राजभाषा – मलयालम
जनसंख्या – 3,34,06,061
जनसंख्या घनत्व – 860 /किमी
जिलों की संख्या – 14
क्षेत्रफल – 38,863 किमी
साक्षरता दर (2011) – 70.63%
वर्त्तमान साक्षरता दर – 93.91%
लिंगानुपात – 1000/1084
राजकीय पशु – हाथी
राजकीय पक्षी – ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल
राजकीय वृक्ष – नारियल
राजकीय फूल– गोल्डन शावर पेड़ फूल
राजकीय मछली – ग्रीन क्रोमाइड
विधान सभा सीटों की संख्या – 140
राज्य सभा सीटों की संख्या – 9
लोक सभा सीटों की संख्या – 20
डाक सूचक संख्या – 67 से 69
वाहन अक्षर – KL

केरल सामान्य ज्ञान Kerala Samanya Gyan

1. केरल की सीमाएँ पश्चिम ओर से अरब सागर से घिरा हुआ है और उत्तर में कर्नाटक एवं पूर्व दक्षिण से तमिलनाडु सटा हुआ हैं। पश्चिम भाग अरब सबाग होने के करना इसे जैव-विविधता से समृद्ध घोषित किया गया है।
2. इस राज्य में 590 किमी लंबी समुद्र तटरेखा है। राज्य को तीन विशेष क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है: पूर्वी हाइलैंड, सेंट्रल मिडलैंड और वेस्टर्न लोलैंड।
3. स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व केरल में राजाओं की रियासतें थीं। जुलाई 1949 में तिरुवितांकूर और कोच्चिन रियासतों को जोड़कर ‘तिरुकोच्चि’ राज्य का गठन किया गया। उस समय मलाबार प्रदेश मद्रास राज्य (वर्तमान तमिलनाडु) का एक जिला मात्र था। नवंबर 1956 में तिरुकोच्चि के साथ मलाबार को भी जोड़ा गया और इस तरह वर्तमान केरल की स्थापना हुई।
4. केरल में शिशु मृत्यु दर भारत में सबसे कम है। यूनिसेफ (United Nations International Children’s Emergency Fund) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) द्वारा मान्यता प्राप्त विश्व का प्रथम शिशु सौहार्द राज्य है।
5. केरल की साक्षरता दर भारत में सबसे अधिक है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की आबादी यहाँ अधिक है। प्रति 1000 पुरुषों पर महिलााओं की 1084 है।
इस राज्य को “गॅाड्स ओन कंट्री“ भी कहा जाता है। इसका कोवलम समुद्र तट दुनिया भर में मशहूर है।
6. यहाँ की प्रमुख फसलें है नारियल, चाय, रबर, काजू, काली मिर्च, वेनिला, इलायची, दालचीनी और जायफल हैं।
7. भारत के अन्य राज्यों की तुलना में आबादी की कम वृद्धि दर, राष्ट्रीय औसत सघनता से ऊँची दर, ऊँची आयु-दर, गंभीर स्वास्थ्य चेतना, कम शिशु मृत्यु दर, ऊँची साक्षरता, प्राथमिक शिक्षा की सार्वजनिकता, उच्च शिक्षा की सुविधा आदि आर्थिक प्रगति के अनुकूल हैं।
8. यहाँ मनाये जाने वाले प्रमुख हिन्दू त्योहार हैं – विषु, नवरात्रि, दीपावली, शिवरात्रि, तिरुवातिरा आदि। मुसलमान रमज़ान, बकरीद, मुहरम, मिलाद-ए-शरीफ आदि मनाते हैं तो ईसाई क्रिसमस, ईस्टर आदि।
9. केरलीय कलाओं को सामान्यतः दो वर्गों में बाँट सकते हैं – एक दृश्य कला और दूसरी श्रव्य कला। दृश्य कला के अंतर्गत रंगकलाएँ, अनुष्ठान कलाएँ, चित्रकला और सिनेमा आते हैं।
10. केरल पर्यटकों में बेहद लोकप्रिय है, इसीलिए इसे ‘God’s Own Country’ अर्थात् ‘ईश्वर का अपना घर’ नाम से पुकारा जाता है। यहाँ अनेक प्रकार के दर्शनीय स्थल हैं, जिनमें प्रमुख हैं – पर्वतीय तराइयाँ, समुद्र तटीय क्षेत्र, अरण्य क्षेत्र, तीर्थाटन केन्द्र आदि।
11. वैज्ञानिक तकनीकी क्षेत्रों में भी केरल बहुत आगे है। गणित, ज्योतिषी, ज्योतिष, आयुर्वेद, वास्तुकला, धातु विज्ञान आदि क्षेत्रों में केरलीयों ने उल्लेखनीय योगदान किया है।
12. केरल राज्य 14 जिलों में बँटा है – अलाप्पुज़ा, एर्नाकुलम, इडुक्की, कन्नूर, कासरगोड़, कोल्लम, कोट्टायम, कोझीकोड, मलप्पुरम, पलक्कड़, पथानामथिट्टा, तिरुवनंतपुरम, थ्रिसूर और वायनाड।
13. विश्व भर में केरल अपनी आयुर्वेदिक चिकित्सा शैली के कारण प्रसिद्ध है। आयुर्वेद दो हज़ार वर्ष पुरानी भारतीय चिकित्सा-पद्धति है।
14. केरल में 44 नदियाँ है जिसमे प्रमुख नदियां भारतपुझा, पम्बा, चलियार अदि।
15. ओडियन,कुरुमन, वायनाड, मुलुवन, पालियान अदि यहाँ की प्रमुख जनजातियाँ हैं।




केरल का पर्यटन
* पर्यटन गतिविधियों के लिए केरल में स्थायी और सफल वृद्धि के लिए अपेक्षित वातावरण पहले से विद्यमान है। पर्यटन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण तत्व है – प्राकृतिक सौंदर्य, सामान्य जलवायु, स्वच्छ पर्यावरण, मैत्री भाव वाले शांतिप्रिय लोग हैं जो सांस्कृतिक विविधता के प्रति बेहद सहिष्णु हैं और अनूठे पर्यावरण को निर्मित करने की क्षमता रखते हैं। केरल देश में सर्वप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में उभरा है। समुद्र तट, गर्म मौसम, समुद्री झीलें, पर्वतीय स्थल, जल प्रपात, वन्य जीवन, आयुर्वेद, वर्ष भर त्योहार तथा विविध पेड़ पौधे केरल को पर्यटकों के लिए एक अनूठा गंतव्य स्थल बनाते हैं।

* पर्यटन विभाग, केरल पर्यटन विकास निगम, ज़िला पर्यटन संवर्द्धन परिषद, बेकल पर्यटन विकास निगम, स्थानीय प्रशासनों तथा निजी क्षेत्र की पर्यटन में महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान में जो मुख्य क्षेत्र विकास के लिए देखे जा रहे है: वे हैं ग्रामीण पर्यटन, माइस पर्यटन (एम.आई.सी.ई – मीटिंग, इंसेंटिव, कन्वेंशस तथा इवेंट्स/एक्सीबीशन ट्रेड शोज़) यानी – बैठक, प्रोत्साहन, सम्मेलन और प्रदर्शनियां/व्यापार प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक पर्यटन, विरासत पर्यटन, पर्यावरण पर्यटन तथा चिकित्सा पर्यटन।

* थेणमाला पर्यटन सुविधा केन्द्र के साथ पर्यटन परियोजना है, जिसमें शॉप कोर्ट गार्डन, प्लाजा, पिकनिक क्षेत्र, चट्टान पर चढाई, नदी पार का मुक्त प्रेक्षागृह, रेस्तरां, झूलते पुल, कमल के तालाब, संगीतमय नृत्य, फव्वारे, शिल्पमूर्ति वाले बाग, हिरण पुनर्वास केंद्र, नौकायन, बैटरी चालित वाहन आदि हैं। वन विभाग के समन्वय से पकरूवी में ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्ष 2004-05 में, 104622 पर्यटक थेणमाला पर्यावरण (इको) पर्यटन स्थल देखने गए और 3563820 लाख रुपए की राजस्व प्राप्ति हुई।

* राज्य में 2004 में विदेशी पर्यटकों से विदेशी मुद्रा में 1266.77 करोड़ रुपए की आय हुई और घरेलू पर्यटकों से 3881.92 करोड़ रुपए की आय हुई। पर्यटन से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कुल आय लगभग 6829 करोड़ रुपए हुई। पर्यटन में 8 लाख लोगों को रोज़गार मिला हुआ है और प्रतिवर्ष 500 करोड़ रुपए का निवेश किया जाता है।




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