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धारा 370 क्या है, धारा 35A क्या है, Dhara 370 Kya Hai

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धारा 370 क्या है

अनुच्छेद 370 का वर्णन भारतीय संविधान के भाग 21 में किया हैl अनुच्छेद 370 के जरिए जम्मू और कश्मीर को विशेष स्वायत्तता वाले राज्य का दर्जा दिया गया है।

ब्रिटिश हुकूमत की समाप्ति के साथ ही जम्मू और कश्मीर भी आज़ाद हुआ था। शुरू में इसके शासक महाराज हरीसिंह ने फैसला किया कि वह भारत या पाकिस्तान में सम्मिलित न होकर स्वतंत्र रहेंगे, लेकिन 20 अक्टूबर, 1947 को पाकिस्तान समर्थक आज़ाद कश्मीर सेना ने राज्य पर आक्रमण कर दिया, जिससे महाराज हरीसिंह ने राज्य को भारत में मिलाने का फैसला लिया।

विलय पत्र इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन (IoA) पर 26 अक्टूबर, 1947 को पण्डित जवाहरलाल नेहरू और महाराज हरीसिंह ने हस्ताक्षर किये और गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने 27 अक्तूबर, 1947 को इसे स्वीकार कर लिया। इस विलय पत्र के अनुसार- “राज्य केवल तीन विषयों- रक्षा, विदेशी मामले और संचार -पर अपना अधिकार नहीं रखेगा, बाकी सभी पर उसका नियंत्रण होगा। उस समय भारत सरकार ने आश्वासन दिया कि इस राज्य के लोग अपने स्वयं के संविधान द्वारा राज्य पर भारतीय संघ के अधिकार क्षेत्र को निर्धारित करेंगे।

जब तक राज्य विधानसभा द्वारा भारत सरकार के फैसले पर मुहर नहीं लगाया जायेगा, तब तक भारत का संविधान राज्य के सम्बंध में केवल अंतरिम व्यवस्था कर सकता है। इसी क्रम में भारतीय संविधान के भाग 21 में अनुच्छेद 370 जोड़ा गया, जिसमें बताया गया कि जम्मू-कश्मीर से सम्बंधित राज्य उपबंध केवल अस्थायी है, स्थायी नहीं।

शेख़ अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 को लेकर यह दलील दी थी कि संविधान में इसका प्रबंध अस्थाधयी रूप में ना किया जाए। उन्होंने राज्य के लिए लोहे की तरह मजबूत स्वायत्ता की मांग की थी, जिसे केंद्र ने ठुकरा दिया था। 1965 तक जम्मू और कश्मीर में राज्यपाल की जगह ‘सदर-ए-रियासत’ और मुख्यमंत्री की जगह प्रधानमंत्री हुआ करता थाl

अनुच्छेद 370 में अनुच्छेद 1 का उल्लेख है, जिसमें राज्यों की सूची में जम्मू-कश्मीर का नाम शामिल है। 370 को एक पुल के रूप में वर्णित किया गया है जिसके माध्यम से संविधान को जम्मू-कश्मीर में लागू किया जाता है। भारत ने जम्मू और कश्मीर के लिये भारतीय संविधान के प्रावधानों का विस्तार करने हेतु अनुच्छेद 370 का कम-से-कम 45 बार उपयोग किया है। संघ सूची की 97 प्रविष्टियों में से 94; समवर्ती सूची की 47 वस्तुओं में से 26 जम्मू और कश्मीर पर लागू होती हैं। 395 अनुच्छेदों में से 260 को एवं 12 अनुसूचियों में से 7 को राज्य में विस्तारित किया गया है।




अनुच्छेद 35A क्या है

अनुच्छेद 35A, जो कि अनुच्छेद 370 का विस्तार है, राज्य के स्थायी निवासियों को परिभाषित करने के लिये जम्मू-कश्मीर राज्य की विधायिका को शक्ति प्रदान करता है और उन स्थायी निवासियों को विशेषाधिकार प्रदान करता हैl अनुच्छेद 35A,14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था. इस आदेश के जरिए भारत के संविधान में एक नया अनुच्छेद 35A जोड़ दिया गयाl

अनुच्छेद 35A संविधान में शामिल प्रावधान है जो जम्मू और कश्मीर विधानमंडल को यह अधिकार प्रदान करता है कि वह यह तय करे कि जम्मू और कश्मीर का स्थायी निवासी कौन है और किसे सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में विशेष आरक्षण दिया जायेगा, किसे संपत्ति खरीदने का अधिकार होगा, किसे जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव में वोट डालने का अधिकार होगा, छात्रवृत्ति तथा अन्य सार्वजनिक सहायता और किसे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का लाभ मिलेगा.

अनुच्छेद 35A में यह प्रावधान है कि यदि राज्य सरकार किसी कानून को अपने हिसाब से बदलती है तो उसे किसी भी कोर्ट में चुनौती नही दी जा सकती है. इस अनुच्छेद का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की जनसांख्यिकीय संरचना की रक्षा करना था। अनुच्छेद 35A की संवैधानिकता पर इस आधार पर बहस की जाती है कि इसे संशोधन प्रक्रिया के माध्यम से नहीं जोड़ा गया था। हालाँकि, इसी तरह के प्रावधानों का इस्तेमाल अन्य राज्यों के विशेष अधिकारों को बढ़ाने के लिये भी किया जाता रहा है।




जम्मू-कश्मीर में विशेष अधिकार

-अनुच्छेद 370 के तहत भारत के सभी राज्यों में लागू होने वाले क़ानून जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होते। भारत सरकार केवल रक्षा, विदेश नीति, वित्त और संचार जैसे मामलों में ही दख़ल दे सकती है। इसके अलावा संघ और समवर्ती सूची के तहत आने वालों विषयों पर केंद्र सरकार क़ानून नहीं बना सकती।

-राष्ट्रपति, लोक अधिसूचना द्वारा घोषणा कर सकते हैं कि इस अनुच्छेद को तब तक कार्यान्वित नहीं किया जा सकेगा जब तक कि राज्य विधानसभा इसकी सिफारिश नहीं कर देती है|

-जम्मू-कश्मीर की नागरिकता, प्रॉपर्टी की ओनरशिप और अन्य सभी मौलिक अधिकार राज्य के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इन मामलों में किसी तरह का क़ानून बनाने से पहले संसद को राज्य की अनुमति लेनी आवश्यक है।

-राज्य का नाम और सीमाओं को इसकी विधायिका की सहमति के बिना बदला नहीं जा सकता है।

-अलग प्रॉपर्टी ओनरशिप होने की वजह से किसी दूसरे राज्य का भारतीय नागरिक जम्मू-कश्मीर में जमीन या अन्य प्रॉपर्टी नहीं ख़रीद सकता।

-जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है। एक नागरिकता जम्मू-कश्मीर की तथा दूसरी भारत की।

-भारत के दूसरे राज्यों के नागरिक यहाँ कोई भी सरकारी नौकरी हासिल नहीं कर सकते।

– राज्य का अपना अलग संविधान, एक अलग ध्वज और एक अलग दंड संहिता (रणबीर दंड संहिता) है।

-राज्य की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है, जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का है।

-जम्मू-कश्मीर में भारत के राष्ट्रीय ध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं माना जाता।

-भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं।

-यदि जम्मू-कश्मीर की कोई महिला भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जाती है। इसके विपरीत यदि वह महिला पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस पाकिस्तानी पुरुष को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जायेगी।

-कश्मीर में महिलाओं पर शरियत क़ानून लागू है।

-राज्य में अल्पसंख्यकों (हिन्दू-सिक्ख) को 16 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिलता।

-‘अनुच्छेद 370’ की वजह से ही कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है।




भाग 21 में आने वाला अनुच्छेद

शीर्षक= अस्थायी, संक्रमण कालीन और विशेष उपबंध

अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थायी उपबंध है
अनुच्छेद 371 महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के संबंध में विशेष उपबंध
अनुच्छेद 371क. नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष उपबंध
अनुच्छेद 371ख. असम राज्य के संबंध में विशेष उपबंध
अनुच्छेद 371ग. मणिपुर राज्य के संबंध में विशेष उपबंध
अनुच्छेद 371घ. आंध्र प्रदेश राज्य के संबंध में विशेष उपबंध
अनुच्छेद 371च. सिक्किम राज्य के संबंध में विशेष उपबंध
अनुच्छेद 371छ. मिजोरम राज्य के संबंध में विशेष उपबंध
अनुच्छेद 371ज. अरुणाचल प्रदेश राज्य के संबंध में विशेष उपबंध
अनुच्छेद 371झ. गोवा राज्य के संबंध में विशेष उपबंध
अनुच्छेद 372. विद्यमान विधियों का प्रवृत्त बने रहना और उनका अनुकूलन
अनुच्छेद 376. उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के बारे में उपबंध
अनुच्छेद 377. भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के बारे में उपबंध
अनुच्छेद 378. लोक सेवा आयोगों के बारे में उपबंध
अनुच्छेद 378क. आंध्र प्रदेश विधान सभा की अवधि के बारे में विशेष उपबंध
अनुच्छेद 379-391. संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा निरसित।
अनुच्छेद 392. कठिनाइयों को दूर करने की राष्ट्रपति की शक्ति



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