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दुनियाँ के इन सभी देशों में अब तक नोट बंदी हो चुकीं हैंl विमुद्रीकरण क्या है

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दुनियाँ के इन सभी देशों में अब तक नोट बंदी हो चुकीं हैं जानिए

विमुद्रीकरण क्या है?– किसी भी देश की सरकार किसी पुरानी मुद्रा को कानूनी तौर पर बंद कर देती है तो इसे विमुद्रीकरण (डीमोनेटाइजेशन) कहते हैं। विमुद्रीकरण के बाद उस मुद्रा की कुछ कीमत नहीं रह जाती। उससे किसी तरह की खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकती। सरकार द्वारा बंद किए गए नोटों को बैंकों में बदलकर उनकी जगह नए नोट लेने के लिए समयसीमा तय कर देती है। उस दौरान जिसने अपने नोट बैंकों में जाकर नहीं बदले या जमा नहीं किए उनके नोट कागज का टुकड़ा बनकर रह जाते हैं।

क्यों किया जाता है?– सरकार ऐसा कई कारणों से कर सकती है। सरकार पुराने नोटों की जगह नए नोट लाने पर पुराने नोटों का विमुद्रीकरण कर देती है। मुद्रा की जमाखोरी (कालाधन) को खत्म करने के लिए भी बड़े राशि के नोटों का विमुद्रीकरण किया जाता है। आतंकवाद, अपराध और तस्करी जैसे आपराधिक कामों में भी बड़े पैमाने पर नगद लेन-देन होता है। इन कामों में लिप्त लोग कई बार नगद राशि अपने पास जमा रखते हैं। बाजार में कई बार नकली नोट भी प्रचलन में आ जाते हैं। सरकार नकली नोटों से छुटकारा पाने के लिए पुराने नोट बदल देती है। जालसाजी से बचने के लिए नई तकनीकी से तैयार किए गए ज्यादा सुरक्षित नोट लाने पर भी सरकार पुराने नोटों का विमुद्रीकरण कर देती है। टैक्स चोरी के लिए किए जाने वाले नगद लेन-देन को हतोत्साहित करने के लिए भी सरकारें कई बार विमुद्रीकरण का रास्ता अपनाती हैं। विमुद्रीकरण के और भी कई कारन हो सकता हैl



वेनेजुएला 2018:- देश की मुद्रा से तीन शून्य हटाने का फैसला लिया गया हैl इससे पहले 2008 में भी ऐसा किया जा चुका है लेकिन तब भी अर्थव्यवस्था को कोई फायदा नहीं हुआ थाl वेनेजुएला में सबसे बड़ा नोट एक लाख बोलिवर का होता है, जो अब 100 के नोट में तब्दील हो जाएगाl एक किलो चीनी ढाई लाख बोलिवर की मिलती है, जिसकी कीमत अब ढाई सौ हो जाएगीl

भारत 2017:- देश में झटपट हुई नोटबंदी सफल रही या विफल, इस पर मतभेद हैंl कई रिपोर्टें इसे गैरजरूरी कदम बताती हैं, तो सरकार काले धन को खत्म करने पर अपनी पीठ थपथपाती दिखती हैl अचानक ही लिए इस कदम से नागरिकों को मुश्किलें तो हुई हीl

पाकिस्तान 2016:- भारत से एक साल पहले पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी नोट बदलेl हालांकि यहां भारत जैसा असमंजस का माहौल नहीं दिखाl 10,50,100 और 1,000 के पुराने नोटों की जगह नए नोट बाजार में आएl 18 महीने पहले इसकी तैयारी शुरू हुई और नागरिकों को नोट बदलने के लिए अच्छा खासा वक्त दिया गयाl

जिम्बाब्वे 2015:- आपको जान कर हैरानी होगी कि जिम्बाब्वे का सबसे बड़ा नोट एक लाख अरब का हुआ करता थाl 2015 में पुरानी मुद्रा को हटा दिया गया और उसकी जगह अमेरिकी डॉलर ने ले लीl इस बदलाव में कुल तीन महीने का वक्त लगाl

उत्तर कोरिया 2010:- देश के तत्कालीन नेता किम जोंग इल ने इस उम्मीद में मुद्रा के दो शून्य हटा दिए कि अर्थव्यवस्था में सुधार आएगाl लेकिन देश पर उल्टा ही असर देखने को मिलाl महंगाई और बढ़ गई, देश में खाने के सामान की भी किल्लत पैदा हो गईl

यूरो जोन 2002:- यहां केवल नोट ही नहीं, पूरी मुद्रा ही बदल गईl यूरो जोन ने 1 जनवरी 2002 से यूरो को लागू कियाl यह एक बेहतरीन उदाहरण है कि मुद्रा के साथ बदलाव में किस तरह की तैयारियों की जरूरत पड़ती हैl चार साल पहले ही नोटों की छपाई शुरू हो गई थी, यूरोपीय सेंट्रक बैंक ने तीन साल पहले से अपने सिस्टम में बदलाव लाना शुरू कर दिया थाl

ऑस्ट्रेलिया 1996:- काले धन से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने 1996 में कागज के नोट हटा कर प्लास्टिक के नोट जारी किएl 1992 में ऑस्ट्रेलिया पहली बार प्लास्टिक के नोट बाजार में लाकर उन्हें टेस्ट कर चुका थाl देश की अर्थव्यवस्था पर इस कदम का अच्छा असर देखने को मिलाl

सोवियत संघ 1991:- मिखाइल गोर्बाचोव के नितृत्व में सरकार ने 50 और 100 के नोटों को बंद करने का फैसला कियाl दिक्कत यह थी कि ये सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नोट थे और बाजार में मौजूद कुल मुद्रा का एक तिहाई हिस्सा इन्हीं का थाl इसके बाद अर्थव्यवस्था ऐसी चरमराई कि लोगों का सरकार पर से भरोसा ही उठ गयाl कुछ इतिहासकार इसे सोवियत संघ के विघटन की एक बड़ी वजह भी मानते हैंl




म्यांमार 1987:-काले धन पर काबू पाने के लिए 1987 में म्यांमार की सेना ने देश की 80 फीसदी मुद्रा को अवैध घोषित कर दियाl इस कदम का असर यह हुआ कि देश ने पहला बड़ा स्टूडेंट आंदोलन देखाl देश में हिंसा भड़की जिसमें हजारों लोगों की जान गईl

नाइजीरिया 1984:- मुहम्मदू बुहारी के नेतृत्व में सैन्य सरकार ने नए नोट जारी किएl उद्देश्य था कर्ज में डूबे हुए देश को एक बार फिर ऊपर उठानाl लेकिन बुहारी को मुंह की खानी पड़ीl अगले ही साल जनता ने उनका तख्ता पलट कर दियाl

घाना 1982:- यह भी नोटबंदी का एक विफल प्रयास थाl लोगों को नोट बदलवाने के लिए गांवों से चल कर शहर तक आना पड़ता थाl समय सीमा खत्म हो जाने के बाद पुराने नोटों को अवैध घोषित कर दिया गया, जबकि बहुत से लोग उन्हें बदलवा नहीं पाए थेl

ब्रिटेन 1971:- इस साल ब्रिटेन ने डेसिमल सिस्टम अपनायाl पहले 12 पेनी की एक शिलिंग और 20 शिलिंग का एक पाउंड होता थाl इस बदलाव के बाद से 100 पेनी का एक पाउंड स्टर्लिंग बनाl





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