भारतीय संविधान के बारे में जानिए बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी

भारतीय संविधान के बारे में जानिए बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी

द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्ति होने के बाद जुलाई 1945 में ब्रिटेन ने भारत संबन्धी अपनी नई नीति की घोषणा की और भारत की संविधान सभा के निर्माण के लिए एक कैबिनेट मिशन भारत भेजा जिसमें 3 मंत्री थे। 15 अगस्त 1947 को भारत के आज़ाद हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1946 से आरम्भ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। जवाहरलाल नेहरू, डॉ भीमराव अम्बेडकर, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे।

इस संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन में कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। भारत के संविधान के निर्माण में डॉ भीमराव अम्बेडकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इसलिए उन्हें ‘संविधान का निर्माता’ कहा जाता है। भारत का संविधान, भारत का सर्वोच्च विधान है जो संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ। यह दिन (26 नवम्बर) भारत के संविधान दिवस के रूप में घोषित किया गया है जबकि 26 जनवरी का दिन भारत में गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान हैl

भारतीय संविधान में अभी वर्तमान में 465 अनुच्छेद, और 12 अनुसूचियां हैं ये 22 भागों में विभाजित है। लेकिन इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद था l जो 22 भागों में विभाजित था, इसमें केवल 8 अनुसूचियां थीं। संविधान में सरकार के संसदीय स्वमरूप की व्य वस्थाे की गई है, जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त संघीय है। केन्द्री य कार्यपालिका का सांविधानिक प्रमुख राष्ट्रसपति है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्द्री य संसद की परिषद् में राष्ट्र पति तथा दो सदन है जिन्हें राज्योंव की परिषद राज्योसभा तथा लोगों का सदन लोकसभा के नाम से जाना जाता है।

संविधान की धारा 74 (1) में यह व्य वस्थाि की गई है कि राष्ट्रंपति की सहायता करने तथा उसे सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगा जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, राष्ट्ररपति इस मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्पािदन करेगा। इस प्रकार वास्तहविक कार्यकारी शक्ति मंत्रिपरिषद् में निहित है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री है जो वर्तमान में अभी नरेन्द्र मोदी हैं। अब तक 122 संविधान संशोधन विधेयक संसद में लाये गये है जिनमे से 101 संविधान संशोधन विधेयक पारित हो चुके है। 8 अगस्त 2016 को संसद ने वस्तु और सेवा कर (GST) पारित कर 101वा संविधान संशोधन किया।

भारतीय संविधान का संशोधन भारत के संविधान में परिवर्तन करने की प्रक्रिया है। एक संशोधन के प्रस्ताव की शुरुआत संसद में होती है जहाँ इसे एक बिल के रूप में पेश किया जाता है।

मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोगों के सदन (लोक सभा) के प्रति उत्तरदायी है। प्रत्येकक राज्य में एक विधानसभा है। जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक,आंध्रप्रदेश और तेलांगना में एक ऊपरी सदन है जिसे विधानपरिषद कहा जाता है। राज्यपपाल राज्यन का प्रमुख है। प्रत्येरक राज्य का एक राज्यशपाल होगा तथा राज्य की कार्यकारी शक्ति उसमें निहित होगी। मंत्रिपरिषद, जिसका प्रमुख मुख्य।मंत्री है, राज्यएपाल को उसके कार्यकारी कार्यों के निष्पादन में सलाह देती है। राज्यं की मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से राज्य की विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है।

संविधान की सातवीं अनुसूची में संसद तथा राज्या विधायिकाओं के बीच विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है। अवशिष्ट शक्तियाँ संसद में विहित हैं। केन्द्रीिय प्रशासित भू-भागों को संघराज्य क्षेत्र कहा जाता है।

संविधान प्रारूप समिति तथा सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय संविधान को संघात्मक संविधान माना है, परन्तु विद्वानों में मतभेद है। अमेरीकी विद्वान इस को ‘छद्म-संघात्मक-संविधान’ कहते हैं, हालांकि पूर्वी संविधानवेत्ता कहते हैं कि अमेरिकी संविधान ही एकमात्र संघात्मक संविधान नहीं हो सकता। संविधान का संघात्मक होना उसमें निहित संघात्मक लक्षणों पर निर्भर करता है, किन्तु माननीय सर्वोच्च न्यायालय (पी कन्नादासन वाद) ने इसे पूर्ण संघात्मक माना है। भारतीय संविधान के प्रस्तावना के अनुसार भारत एक सम्प्रुभतासम्पन्न’, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य है।

वर्तमान समय में भारतीय संविधान के निम्नलिखित भाग हैं

एक उद्देशिका,
465 धाराओं से युक्त 25 भाग,
12 अनुसूचियाँ,
5 अनुलग्नक (appendices)
101 संशोधन।

विधान के उद्देश्यों को प्रकट करने हेतु प्राय: उनसे पहले एक प्रस्तावना प्रस्तुत की जाती है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना अमेरिकी संविधान से प्रभावित तथा विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। प्रस्तावना के माध्यम से भारतीय संविधान का सार, अपेक्षाएँ, उद्देश्य उसका लक्ष्य तथा दर्शन प्रकट होता है। प्रस्तावना यह घोषणा करती है कि संविधान अपनी शक्ति सीधे जनता से प्राप्त करता है इसी कारण यह ‘हम भारत के लोग’ – इस वाक्य से प्रारम्भ होती है। केहर सिंह बनाम भारत संघ के वाद में कहा गया था कि संविधान सभा भारतीय जनता का सीधा प्रतिनिधित्व नहीं करती अत: संविधान विधि की विशेष अनुकृपा प्राप्त नहीं कर सकता, परंतु न्यायालय ने इसे खारिज करते हुए संविधान को सर्वोपरि माना है जिस पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है।

 

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