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भारत की अर्थव्यवस्था 2017 में कैसा रहा नोटबंदी और जीएसटी से

भारत की अर्थव्यवस्था 2017 में कैसा रहा नोटबंदी और जीएसटी से

भारत की अर्थव्यवस्था 2017
भारत की अर्थव्यवस्था 2017

भारत की अर्थव्यवस्था 2017
भारत की अर्थव्यवस्था 2017

भारत की अर्थव्यवस्था 2017 में कैसा रहा नोटबंदी और जीएसटी से

केवल एक साल पहले यह लग रहा था कि भारत विश्व अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अगुवा बनने की राह पर था. 2016 में यह दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था थी, यहां तक की चीन से भी बढ़कर जो मंदी का सामना कर रहा था. भारत को धुंधली वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक चमकते देश के रूप में देखा जा रहा था. लेकिन 2017 में वाकया बदल गया जब भारतीय अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ गयी.
2016 में जनवरी से दिसंबर के दौरान प्रत्येक तिमाही के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में सात फ़ीसदी से अधिक की दर से वृद्धि हुई. एक तिमाही में तो इसने 7.9 फ़ीसदी को भी छुआ. लेकिन 2017 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में ही यह, तीन सालों में न्यूनतम स्तर, 5.7 फ़ीसदी पर जा लुढका.में अचानक हुई नोटबंदी से छोटे व्यापारियों को सबसे अधिक हुई मुश्किलें

नोटबंदी और जीएसटी (भारत की अर्थव्यवस्था 2017)
आर्थिक मोर्चे पर दो प्रमुख निर्णयों का 2017 पर खासा असर रहा. इसमें पहला था, नवंबर 2016 की शुरुआत में अचानक अर्थव्यवस्था में दौड़ रही 86 फ़ीसदी नकदी को रद्द किया जाना, जिसका असर 2017 में भी रहा. दूसरा, स्वतंत्रता के बाद से किया गया सबसे बड़े कराधान वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने में आयी परेशानी थी, जिसने जून 2017 में कई संघीय और राज्य करों की जगह ले ली.IMA
जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाने के लिए सरकार ने पिछले कुछ महीनों में कई बदलावों की घोषणा की. आलोचनाओं के बाद 178 वस्तुओं की जीएसटी दरों में संशोधन भी किए गए.

भारत की अर्थव्यवस्था 2017



भारत की अर्थव्यवस्था 2017

भारतीय रेटिंग एजेंसी केयर के प्रमुख अर्थशास्त्री मदन सबनविस कहते हैं, “जीएसटी लागू किए जाने के कारण 2017 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए परिवर्तन का साल रहा. अगले कुछ सालों के निरंतर विकास के लिए यह जरूरी था.”
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.4 फ़ीसदी की रफ़्तार से बढ़ेगी. हालांकि, पहले इसने 7.7 फ़ीसदी का अनुमान लगाया था.

छोटे कारोबारी अभी नवंबर 2016 की नोटबंदी से उबरे भी नहीं थे कि जीएसटी ने फिर उनकी कमर तोड़ दी. इनमें से कई बंद तक हो गये, इससे लाखों लोग बेरोजगार हो गये, खास कर असंगठित क्षेत्र की नौकरियों पर इसकी बड़ी मार पड़ी.

इस साल कुछ ख़ास उपलब्धियां भी दर्ज की गयीं. इसमें कारोबार करने में सहूलियत के मामले में विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग में जोरदार सुधार हुआ. यहां भारत 30 स्थानों की उछाल मारते हुए विश्व बैंक के शीर्ष 100 देशों में शामिल हो गया. फिर अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट एजेंसी मूडीज़ का 2004 के बाद पहली बार भारत की रेटिंग को बढ़ाया जाना भी एक बड़ी उपलब्धि रही. मूडीज़ ने भारत की रेटिंग को बीएए 3 के बदले बीएए2 किया है, यानी स्टेबल से पॉजिटिव रेटिंग हो गई है. इस बदलाव का मतलब ये है कि भारत निवेश के लिहाज से इटली और फ़िलीपींस जैसे देशों की क़तार में आ गया है.

भारत की अर्थव्यवस्था 2017



भारत की अर्थव्यवस्था 2017

भारतीय शेयर बाज़ार में साल दर साल आधार पर 30 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई जो दुनिया के सर्वेश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक था. गैर-निष्पादित परिसंपत्ति या नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) की वजह से कर्ज में डूबे सार्वजनिक बैंकों के लिए भारत सरकार ने 32 बिलियन डॉलर के बेलआउट पैकेज की घोषणा की. लेकिन कुल मिलाकर, यह एक मुश्किल साल था और 2018 में भी मोदी सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं.’
सत्ता में आने के बाद से मोदी को महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों को लागू करने का श्रेय दिया जा सकता है. लेकिन 2017 में सुस्त अर्थव्यवस्था और 2019 में चुनाव के मद्देनज़र लोगों को उम्मीद है कि वो आगामी वर्ष में सतर्क रहेंगे और कुछ प्रमुख सुधारों को अमलीजामा पहनायेंगे. जोशी ने कहा, “सरकार को पिछले 40 महीनों में लाये गये सभी सुधारों को और मजबूत करने की ज़रूरत है. उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि सुधार ठीक से लागू किए गए हैं और आगे और बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं है.”

सरकार से ग्रामीण भारत पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए वहां समाज कल्याण योजनाओं पर ख़र्च बढ़ाने की उम्मीद किया जा रहा है. नरेंद्र मोदी के लिए 2018 एक निर्णायक साल होगा. उनकी सरकार देश की अर्थव्यवस्था का संचालन कैसे करती है, निश्चित ही 2019 में उनकी चुनावी संभावनाएं बहुत हद तक इस पर टिकी होंगी.

भारत की अर्थव्यवस्था 2017

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