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भारत की वर्तमान समस्या सबसे बड़ी समस्या का हल निकालना होगा

भारत की वर्तमान समस्या सबसे बड़ी समस्या का हल निकालना होगा

2018 में आर्थिक विकास में तेज़ी लाना केंद्र सरकार के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण होगा. हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि सुस्त पड़ी रफ़्तार से उबरना थोड़ा धीमा होगा, हालांकि अधिकतर विशेषज्ञ कहते हैं कि यह तेज़ी 2017 से बेहतर ही होगी.
जेपी मॉर्गन के प्रमुख एशिया अर्थशास्त्री साजिद चिनॉय कहते हैं, “नोटबंदी और जीएसटी से लगे झटकों के प्रभाव स्वाभाविक रूप से फीके पड़ जायेंगे, इससे अर्थव्यवस्था रफ़्तार पकड़ती नज़र आएगी.”

भारत की वर्तमान समस्या



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रोजगार की बड़ी समस्या (भारत की वर्तमान समस्या)
प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक नीतियों में रोजगार सृजन नहीं कर पाना एक बड़ी समस्या बना हुआ है. हालांकि अधिकांश विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालीन समस्या है, उन्हें उम्मीद है कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए सरकार रोजगार को लेकर 2018 में क़दम उठाएगी.
चिनॉय कहते हैं, “हमें उम्मीद है कि सरकार कृषि और निर्माण जैसे छोटे बिज़नेस और सेक्टर में कुछ रोज़गार पैदा करेगी.”
मुंबई स्थित ब्रोकरेज फर्म एंजेल ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष मयूरेश जोशी के मुताबिक, कच्चे तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी और छोटे स्तर पर निजी निवेश का कम होना सरकार के सामने एक और बड़ी चुनौती है. उनका कहना है कि बढ़ती कच्चे तेल की क़ीमतों का सरकार के वित्त पर असर पड़ेगा और इससे मुद्रास्फीति भी बढ़ सकती हैं, जो पिछले कुछ सालों से लगातार रिजर्व बैंक के लक्ष्य के अनुसार 4 फ़ीसदी से कम रही है.
घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत अपने 70% तेल का आयात करता है. अब जबकि वैश्विक स्तर पर लगातार कच्चे तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, तो सरकार के पास दो विकल्प हैं- एक यह खुदरा क़ीमतें बढ़ा सकती है और दूसरा इसके फ़र्क का भुगतान वो खुद करे.
सबनवीस कहते हैं, “लोकसभा चुनाव केवल एक साल बाद हैं, इसलिए सरकार बढ़ी हुई पूरी क़ीमतों को सीधे ग्राहकों से नहीं वसूलना चाहेगी. यह एक अलोकप्रिय क़दम होगा.”
अगले साल आर्थिक विकास की संभावनाएं अच्छी दिख रही हैं, लेकिन सरकार के लिए सबसे बड़ी बाधा नौकरी का सृजन करना है. भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है ,जिसे हर साल 1.2 करोड़ नौकरियों के सृजन करने की ज़रूरत है.
कृषि, निर्माण और छोटे उद्यम भारत में सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्र हैं, क्योंकि इनमें बड़े पैमाने पर श्रम शक्ति का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन ये तीनों क्षेत्र पिछले कुछ सालों से रोजगार पैदा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

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कृषि की समस्या (भारत की वर्तमान समस्या)
साल 2017 में पूरे देश में किसानों ने कई विरोध प्रदर्शन किए. पिछले कुछ सालों से अस्थिर विकास के कारण कृषि क्षेत्र खेती से आमदनी को लेकर संघर्ष कर रहा है. आधी से अधिक भारतीय आबादी कृषि पर निर्भर है. इस दौरान लाखों किसान कर्ज नहीं चुका सके जिससे परेशानियां बढ़ी हैं. कुछ राज्यों, जैसे उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र ने किसानों के लिए कर्ज माफ़ी की घोषणा की लेकिन इसे लागू करने में समस्याएं हैं.
सबनवीस ने कहा, “मोदी सरकार वास्तव में इस पर कुछ नहीं कर सकती क्योंकि कृषि राज्य का विषय है और इसकी समस्या राज्य सरकार ही सुलझा सकती है. हालांकि आम जनों में इसे लेकर धारणा है कि यह केंद्र के अधीन है.”
2018 में आठ राज्यों में चुनाव होंगे, इसमें से चार बड़ी ग्रामीण जनसंख्या वाले हैं.
भारतीय जनता पार्टी इनमें से तीन राज्यों में सरकार में है इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार कृषि की समस्या नहीं सुलझाती है तो इससे उसे चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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