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About Lok Sabha in Hindi लोकसभा

About Lok Sabha in Hindi

 

लोकसभा/About Lok Sabha in Hindi 

संविधान के अनुच्छेद 81 में लोकसभा के बारे में दिया गया है, लोकसभा को संसद का निम्न सदन भी कहा जाता है।मूल संविधान में लोकसभा की सदस्यों की संख्या 500 निश्चित की गयी है। लेकिन इसके सदस्यों की अभी अधिकतम 552 हो सकती है। इनमें से अधिकतम 530 सदस्यों को राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों से और 20 सदस्यों को संघीय क्षेत्रों से निर्वाचित किए जा सकते हैं और राष्ट्रपति अधिकतम दो आंग्ल भारतीय सदस्यों को मनोनित कर सकते हैं। वर्तमान में लोकसभा की सदस्यों की संख्या 545 है। इनमें 530 सदस्य 28 राज्यों से 13 सदस्य 7 केन्द्रशाति प्रदेशों से निर्वाचित होते हैं तथा 2 सदस्य आंग्ल भारतीय वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में राष्ट्रपति द्वारा मनोनित होते हैं। 61वें संविधान संशोधन(2001) के अनुसार लोकसभा एवं विधानसभाओं के सीटों की संख्या 2026 ई0 तक यथावत रखने का निर्णय लिया गया है। लोसभा के सदस्यों का ​चुनाव गुप्त मतदान के द्वारा व्यस्क मताधिकार के आधार पर होता है। मताधिकार करने का आयु पहले 21 वर्ष था लेकिन 61वें संविधान संशोधन 1889 ई0 के अनुसार 18 वर्ष के व्यक्ति को व्यस्क माना गया।

 

लोकसभा सदस्य के लिए योग्यता/Qualification for Lok Sabha Member

वह व्यक्ति भारत का नागरिक होना चाहिए, उसकी आयु न्यूनतम 25 वर्ष होनी चाहिए भारत सरकार या राज्य सरकार में कोई लाभ के पद पर नहीं नहीं होनी चाहिए और वह पागल तथा दिवालिया न हो।

 

लोकसभा का कार्यकाल/Term of Lok Sabha

लोकसभा का अधिकतम कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। यदि समय से पहले भंग न किया जाय तो, लोकसभा का कार्यकाल अपनी पहली बैठक से लेकर अगले पाँच वर्ष तक होता है उसके बाद यह अपने आप भंग हो जाती है। लोकसभा के कार्यकाल के दौरान यदि आपातकाल की घोषणा की जाती है तो संसद को इसका कार्यकाल कानून के द्वारा एक समय में अधिकतम 1 वर्ष तक बढ़ाने का अधिकार है, जबकि आपातकाल की घोषणा समाप्त होने की  स्थिति में इसे भी परिस्थिति में 6 माह से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है।

 

लोकसभा की शक्तियाँ/Powers of Lok Sabha

धन विधायक के संबंध में लोकसभा का निर्णय ​अंतिम होता है। मंत्रिपरिषद केवल लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं। अविश्वास प्रस्ताव सरकार के खिलाफ लोकसभा में ही लाया जा सकता है तथा राष्ट्रीय आपातकाल को जारी रखने के लिए प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है।

 

कार्यवाहक अध्यक्ष (प्रोटेम स्पीकर)/Acting Speaker (Protem Speaker)

जब नया  लोकसभा का आरंभ होता है  तब राष्ट्रपति लोकसभा के किसी सदस्यों में से किसी सदस्यों को कार्यवाहक स्पीकर नियुक्त करता है जिसको संसद मे  लंबा अनुभव होता है। वह राष्ट्रपति द्वारा शपथ ग्रहण करता वह संसद के सभी निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने का कार्य करता है, और नये अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया समापन तक वह कार्यवाहक अध्यक्ष की भूमिका निभाता है।

 

लोकसभा अध्यक्ष/Speaker

अनुच्छेद 93 के अनुसार लोकसभा अपने निर्वाचित सदस्यों में से एक सदस्य को अध्यक्ष चुनेगा लोकसभा में कार्य संचालन का जिम्मेवारी अध्यक्ष का होता है। अभी लोकसभा अध्यक्ष ओम प्रकाश बिड़ला है। लोकसभा अध्यक्ष त्याग—पत्र उपाध्यक्ष को देता है। लोकसभा अध्यक्ष सामान्य सदस्य के रूप में शपथ लेता है। लोकसभा अध्यक्ष को चौदह दिन पूर्व सूचना देकर सदस्यों के बहुमत से पारित होने पर हटाया जा सकता है।

 

लोकसभा अध्यक्ष के कार्य एवं विशिष्ट शक्तियाँ/Functions and special powers of Lok Sabha Speaker

किसी विषय को लेकर प्रस्तुत किया जाने वाला कार्य स्थगन प्रस्ताव अध्यक्ष की अनुमति से पेश किया जाता है। विभिन्न विधेयक के प्रस्तावों पर मतदान करवाना परिणाम घोषित करना तथा समानता की स्थिति में निर्णायक भूमिका निभाते ​हैं। वह किसी विचाराधीन विधेयक पर होने वाले बहस को रोक सकता है। सदन के सदस्यों के प्रश्नों को स्वीकार करना, उन्हें नियमित करना और नियम के विरूद्ध घोषित करने का अधिकार अध्यक्ष को लोकसभा अध्यक्ष को होता है। दोनों सदनों का सम्मिलित सत्र बुलाने पर स्पीकर ही उसका अध्यक्ष होता है उसके अनुपस्थिति होने पर उपाध्यक्ष तथा उसके  भी अनुपस्थित होने पर राज्यसभा का उपसभापति अथवा सत्र द्वारा नामांकि कोई भी सदस्य सत्र का अध्यक्ष हो सकता है। धन बिल का निर्धारण स्पीकर करता है। यदि धन बिल पे स्पीकर सहमति नहीं दर्ज करता है तो उस बिल को धन बिल नहीं माना  जाता है अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है। लोकसभा के विघटन होने पर भी अध्यक्ष पद पर बना रहता है जबतक कि नया अध्यक्ष का चुनाव न हो जाता।  संसदीय समिति उसकी अधीनता में काम करती हैं। उसके किसी समिति का सदस्य चुने जाने पर वह उसका पदेन अध्यक्ष होता है।

 

उपाध्यक्ष/Lok Sabha in Hindi 

अनुच्छेद 93 के अनुसार लोकसभा के सदस्य अपने में से किसी एक को उपाध्यक्ष चुनते हैं  लोकसभा की सदस्यता खत्म हो जाने पर उसका उपाध्यक्ष पद भी खत्म हो जाता है। उपाध्यक्ष अपना त्याग पत्र अध्यक्ष को देता है।

 

लोकसभा के सत्र/Lok Sabha Session

संविधान के अनुच्छेद 85 के अनुसार संसद को सत्र बुलाने का अधिकार प्रदान करता है। संसद के दो सत्रों बीच 6 माह से अधिक का अंतर नहीं होनी चाहिए। परंपरानुसार संसद तीन नियमित सत्रों तथा विशेष सत्रों में आयोजित की जाती है इसका आयोजन राष्ट्रपति के आदेश से होता है। सत्र के प्रारंभ में राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है।बजट सत्र वर्ष का पहला सत्र होता है सामान्यत फरवरी मई के बीच चलता है यह सबसे लंबा तथा महत्वपूर्ण सत्र माना जाता है इसी सत्र मे बजट प्रस्तावित तथा पारित होता है मानॅसून सत्र जुलाई अगस्त के बीच होता है शरद सत्र नवम्बर-दिसम्बर के बीच होता है सबसे कम समयावधि का सत्र होता हैl

 

संसद के विशेष सत्र/Special Session of Parliament

प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति इनका आयोजन करते हैं ये किसी नियमित सत्र के बीच या उससे अलग आयोजित किये जाते हैं विशेष सत्र मे विशेष कार्य पारित किये जाते हैं इसमें सदन कोई अन्य कार्य नहीं कर सकते हैं।

 

लोकसभा का विघटन/Dissolution of Lok Sabha

अनुच्छेद 85 में लोकसभा के विघटन का वर्णन दिया गया है। मंत्रिपरिषद की सलाह पर राष्ट्रपति लोकसभा को समाप्त कर देते है जब तक कि आम चुनाव न हो जाय। विघटन के बाद लोकसभा मे लंबित सभी कार्य समाप्त हो जाते हैं लेकिन राज्यसभा में लंबित कार्य समाप्त नहीं होते हैं तथा राष्ट्रपति के पास जो बिल होते हैं वह भी समाप्त नहीं होते हैं ।

 

कटौती प्रस्ताव/Deduction proposal

यह बजट का ही भाग है केवल लोकसभा मे प्रस्तुत किया जाता है ये प्रस्ताव पर नियंत्रण हेतु लाये जाते हैं ये अनुदानों  मे कटौती कर सकते हैं ये तीन प्रकार के होते हैं नीति सबंधी कटौती— इस प्रस्ताव का ल्क्ष्य लेखानुदान संबंधित नीति की अस्वीकृति है इसमें  मांग को कम कर मात्र एक रुपया किया जाता है यदि इस प्रस्ताव को पारित कर दिया जाये तो यह सरकार की नीति संबंधी पराजय मानी जाती है उसे तुरंत अपना विश्वास सिद्ध करना होता है किफायती कटौती— भारत सरकार के व्यय को उससीमा तक कम कर देती है जो संसद के मतानुसार किफायती होगी यह कटौती सरकार की नीतिगत पराजय नहीं मानी जाती है। सांकेतिक कटौती— में  संसद सदस्यों की विशेष शिकायतें होती हैं इस समस्या को निपटाने हेतु प्रयोग होती है जो कि भारत सरकार से संबंधित है इसके अन्तर्गत मांगे गये धन से मात्र सौ रूपये की कटौती की जाती है। यह कटौती सरकार की पराजय नहीं मानी जाती है।

 

लोकसभा सीटों की संख्या/Number of Lok Sabha Seats

  1. बिहार -40
  2. उत्तर प्रदेश -80
  3. सिक्किम – 1
  4. राजस्थान – 25
  5. ओडिशा -20
  6. तमिलनाडु – 39
  7. असम -14
  8. नागालैंड -1
  9. मिजोरम – 1
  10. मेघालय – 2
  11. पश्चिम बंगाल -42
  12. मणिपुर -2
  13. 13 . पंजाब -13
  14. महाराष्ट्र -48
  15. मध्य प्रदेश -29
  16. केरल -20
  17. कर्नाटक -28
  18. आंध्र प्रदेश -42
  19. झारखण्ड -14
  20. हिमाचल प्रदेश -4
  21. अरुणाचल प्रदेश -2
  22. हरियाणा – 10
  23. गुजरात -26
  24. त्रिपुरा -2
  25. उत्तराखण्ड -5
  26. तेलंगाना -17
  27. गोवा -2
  28. छत्तीसगढ़ -11
  29. जम्मू और कश्मीर —

 

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