UPSC Mains Optional Agriculture Paper 1 & 2 Syllabus PDF P-9

UPSC Mains Optional Agriculture Paper 1 & 2 Syllabus PDF P-9

यूपीएससी मुख्य परीक्षा सिलेबस ऐच्छिक विषय (UPSC Mains Exam Syllabus Optional Paper)

कृषि विज्ञान सिलेबस Agriculture Syllabus

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कृषि विज्ञान ऐच्छिक विषय-1,मार्क्स 250,समय 3 घंटा
कृषि विज्ञान ऐच्छिक विषय-2.मार्क्स 250,समय 3 घंटा

Agriculture Optional Paper 1 Syllabus

1. पारिस्थितिकी एवं मानव के लिए उसकी प्रासंगिकता, प्राकृतिक संसाध्न, उनके अनुरक्षण का प्रबंध तथा संरक्षण ।
-सस्य वितरण एवं उत्पादन के कारकों के रूप में भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण । कृषि पारिस्थितिकी, -पर्यावरण के संकेतक के रूप में सस्य क्रम।
-पर्यावरण प्रदूषण एवं फसलों को होने वाले इससे संबंधित खतरे ।
-पशु एवं मान।
-जलवायु परिवर्तन-अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय एवं भूमंडलीय पहल।
-ग्रीन हाउस प्रभाव एवं भूमंडलीय तापन।
-पारितंत्र विश्लेषण के प्रगत उपकरण-सुदूर संवेदन एवं भौगोलिक सूचना प्रणालियाँ।

 

2. देश के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में सस्य क्रम।
-सस्य क्रम में विस्थापन पर अध्कि पैदावार वाली तथा अल्पावधि किस्मों का प्रभाव।
-विभिन्न सस्यन एवं कृषि प्रणालियों की संकल्पनाएँ।
-जैव एवं परिशुद्दता कृषि।
-महत्वपूर्ण अनाज, दलहन, तिलहन, रेशा, शर्करा, वाणिज्यिक एवं चारा पफसलों के उत्पादन हेतु पैकेज रीतियाँ ।

 

3. -विभिन्न प्रकार के वन रोपण जैसे कि सामाजिक वानिकी, कृषि वानिकी एवं प्राकृतिक वनों की मुख्य विशेषताएं तथा विस्तार।
-वन पादपों का प्रसार।
-वनोत्पाद। कृषि वानिकी एवं मूल्य परिवर्धन।
-वनों की वनस्पतियों और जंतुओं का संरक्षण ।

 

4. -खरपतवार, उनकी विशेषताएंl
-प्रकीर्णन तथा विभिन्न पफसलों के साथ उनकी संबद्दता उनका गुणनl
-खरपतवारों का संवर्धी, जैव तथा रासायनिक नियंत्राणl

 

5. -मृदा-भौतिकी, रासायनिक तथा जैविक गुणधर्म।
-मृदा रचना के प्रक्रम तथा कारक।
-भारत की मृदाएँ।
-मृदाओं के खनिज तथा कार्बनिक संघटक तथा मृदा उत्पादकता अनुरक्षण में उनकी भूमिका।
-पौधें के लिए आवश्यक पोषक तत्व तथा मृदाओं और पादपों के अन्य लाभकर तत्व।
-मृदा उर्वरता, मृदा परीक्षण एवं उर्वरक संस्तावना के सिद्दांत।
-समाकलित पोषकतत्व प्रबंध।
-जैव उर्वरक, मृदा में नाइट्रोजन की हानि, जलमग्न धन-मृदा में नाइट्रोजन उपयोग क्षमता।

-मृदा मे नाइट्रोजन योगिकीकरण।
-फास्फोरस एवं पोटेशियम का दक्ष उपयोग।
-समस्याजनक मृदाएँ तथा उनका सुधर।
-ग्रीन हाउफ गैस उत्सर्जन को प्रभावित करने वाले मृदा कारक।
-मृदा संरक्षण, समाकलित जल-विभाजन प्रबंधन।
-मृदा अपरदन एवं इसका प्रबंधन।
-वर्षाधीन कृषि और इसकी समस्याएँ।
-वर्षा पोषित कृषि क्षेत्रों में कृषि उत्पादन में स्थिरता लाने की प्रौद्योगिकी ।

 

6. सस्य उत्पादन से संबंधित जल उपयोग क्षमताl
-सिंचाई कार्यक्रम के मानदंड
-सिंचाई जल की अपवाह हानि को कम करने की विधियाँ तथा साधनl
-ड्रिप तथा छिड़काव द्वारा सिंचाई।
-जलाक्रांत मृदाओं से जलनिकासl
-सिंचाई जल की गुणवत्ताl
-मृदा तथा जल प्रदूषण पर औद्योगिक बहिस्रावों का प्रभाव।
-भारत में सिंचाई परियोजनाएँ।

 

7. -फार्म प्रबंधन, विस्तार, महत्व तथा विशेषताएं, फार्म आयोजना।
-संसाधनों का इष्टतम उपयोग तथा बजटन।
-विभिन्न प्रकार की कृषि प्रणालियों का अर्थशास्त्र।
-विपणन प्रबंध्न-विकास की कार्यनीतियाँ, बाजार आसूचना।
-कीमत में उतार-चढ़ाव एवं उनकी लागतl

-कृषि अर्थव्यस्था में सहकारी संस्थाओं की भूमिकाl
-कृषि के प्रकार तथा प्रणालियाँ और उनको प्रभावित करने वाले कारक।
-कृषि कीमत नीति, फसल बीमा ।

 

8. -कृषि विस्तार, इसका महत्व और भूमिकाl
-कृषि विस्तार कार्यक्रमों के मूल्यांकन की विधियाँl
-सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण तथा छोटे-बड़े और सीमांत कृषकों व भूमिहीन कृषि श्रमिकों की स्थिति।
-विस्तार कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम।
-कृषि प्रौद्योगिकी के प्रसार में कृषि विज्ञान केन्द्रों की भूमिका।
-गैर-सरकारी संगठन तथा ग्रामीण विकास के लिए स्व-सहायता उपागम

 

Agriculture Optional Paper 2 Syllabus

1. -कोशिका संरचना, प्रकार्य एवं कोशिका चक्र।
-आनुवंशिक उपादान का संश्लेषण, संरचना तथा प्रकार्य।
-आनुवंशिकता के नियम।
-गुणवत्ता संरचना, गुणसूत्र, विपथनl
-सहलग्नता एवं जीन-विनिमय एवं पुनर्योजन प्रजनन में उनकी सार्थकता।
-बहुगुणिता, सुगुणित तथा असुगुणित।
-उत्परिवर्तन एवं सस्य सुधर में उनकी भूमिका।
-वंशागतित्व, बंध्यता तथा असंयोज्यता वर्गीकरण तथा सस्य सुधर में उनका अनुप्रयोग।
-कोशिका द्रव्यी वंशागति, लिंग सहलग्नl
-लिंग प्रभावित तथा लिंग सीमित लक्षण ।

 

2. -पादप प्रजनन का इतिहास।
-जनन की विधियाँ, स्वनिषेचन तथा संस्करण प्रविधियाँ।
-सस्य पादपों का उद्गम, विकास एवं उपजाया जानाl
-उद्गम केन्द्र, समजात श्रेणी का नियम, सस्य आनुवंशिक संसाधन-संरक्षण तथा उपयोग।
-पादप प्रजनन के सिद्दांतों का अनुप्रयोग, सस्य पादपों का सुधार।
-आण्विक सूचक एवं पादप सुधार में उनका अनुप्रयोग।
-शुद्द वंशक्रम वरम, वंशावली, समूह तथा पुनरावर्ती वरण, संयोजी क्षमता, पादप प्रजनन में इसका महत्व।
-संकर ओज एवं उसका उपयोग।

-कार्य संकरण।
-रोग एवं पीड़क प्रतिरोध् के लिए प्रजनन।
-अंतरजातीय तथा अंतरावंशीय संकरण की भूमिका।
-सस्य सुधर में आनुवंशिक इंजीनियरी एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका।
-आनुवंशिकतः रूपांतरित सस्य पादप।

 

3. -बीज उत्पादन एवं प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियां।
-बीज प्रमाणन, बीज परीक्षण एवं भंडारण।
-DNA। फिंगरप्रिंटिंग एवं बीज पंजीकरण।
-बीज उत्पादन एवं विपणन में सरकारी एवं निजी क्षेत्रों की भूमिका।
-बौद्दिक संपदा अधिकार सम्बन्धी मामले।
-पादप पोषण, पोषक तत्वों के अवशोषण, स्थानान्तरण एवं उपापचय के संदर्भ में पादप कार्यिकी के सिद्दांत।

 

4. -मृदा-जलपादप सम्बन्ध।
-राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीतियां, अधिप्राप्ति, वितरण की बाध्यताएं ।
-भारत में खाद्य उत्पादन एवं उपभोग की प्रवृत्तियां।

 

5. -पीड़िकों एवं फसलों, सब्जियों, फलोद्यानों एवं बागान फसलों के रोगों का निदान एवं उनका आर्थिक महत्व।
-पीड़कों एवं रोगों का वर्गीकरण एवं उनका प्रबंधन।
-भंडारण के पीड़क और उनका प्रबंधन।
-पीड़कों एवं रोगों की जीव वैज्ञानिक रोकथाम।
-जानपदिक रोग विज्ञान एवं प्रमुख पफसलों की पीड़कों व रोगों का पूर्वानुमान।
-पादप संगरोध् उपाय।
-पीड़क नाशक, उनका सूत्राण एवं कार्यप्रकार।

 

6. -प्रकिण्व एवं पादप-वर्णक प्रकाश संश्लेषण-आधुनिक संकल्पनाएँ और इसके प्रक्रम को प्रभावित करने वाले कारक, आक्सी व अनाक्सी श्वसन C3 C4 एवं CAM क्रियाविधियाँ।
-कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं वसा उपापचय।
-वृद्दि एवं परिवर्धन दीप्तिकालिता एवं वसंतीकरण।
-पादप वृद्दि उपादान एवं सस्य उत्पादन में इनकी भूमिका।
-बीज परिवर्धन एवं अनुकरण की कार्यिकी प्रसुप्ति।
-प्रतिबल कार्यिकी-वातप्रवाह, लवण एवं जल प्रतिबल।

-प्रमुख फल, बागान फसल, सब्जियाँ, मसाले एवं पुष्पी फसल।
-प्रमुख बागवानी फसलों की पैकेज रीतियाँ।
-संरक्षित कृषि एवं उच्च तकनीकी बागवानी।
-तुड़ाई के बाद की प्रौद्योगिकी एवं पफलों व सब्जियों का मूल्यवर्धन।
-मूसुदर्शनीकरण एवं वाणिज्यिक पुष्पकृषि।
-औषधीय एवं एरोमैटिक पौधे।
-मानक पोषण में फलों व सब्जियों की भूमिका।

 

7. खाद्यान्नों की उपलब्धता, खाद्य पर प्रति व्यक्ति व्यय।
-गरीबी की प्रवृत्तियाँ, जन वितरण प्रणाली तथा गरीबी रेखा के नीचे की जनसंख्या, लक्ष्योन्मुखी जन वितरण प्रणाली (PDS) भूमंडलीकरण के संदर्भ में नीति कार्यान्वयन ।
-प्रक्रम बाध्यताएं।
-खाद्य उत्पादन का राष्ट्रीय आहार दिशा-निर्देशों एवं खाद्य उपभोग प्रवृत्ति से सम्बन्ध।
-क्षुधशमन के लिए खाद्यधरित आहार उपागम।
-पोषक तत्वों की न्यूनता-सूक्ष्म पोषक तत्व न्यूनता: प्रोटीन उफर्जा कुपोषण या प्रोटीन कैलोरी कुपोषण (PAM)या (PCM), महिलाओं और बच्चों की कार्यक्षमता के संदर्भ में सूक्ष्म पोषक तत्व न्यूनता एवं मानव संसाधन विकास ।
-खाद्यान्न उत्पादकता एवं खाद्य सुरक्षा ।

 

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